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Sarveshwari Jagdishwari Bhajan – Hindi Lyrics


सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी ।
ममतामयी करुणामयी – २ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

जगजीवनी संजीवनी, समस्त जीवनेश्वरी। – २
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

कृपालिनी जगतारिणी, प्रतिपल भुवन हृदयेश्वरी। -२
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।- २

तमहारीनी शुभकारणी, मनमोहिनी विश्वेश्वरी। – २
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।
ममतामयी करुणामयी – २ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

Jai Mata Di.

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Achyutam Keshavam (अच्युतम केशवं ) Hindi Lyrics


अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || -2

कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, तुम गोपी के जैसे नचाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान नचाते नहीं, गोपियों की तरह तुम नाचते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

Aarti Kunj Bihari Ki : Hindi Lyrics : Lord Krishana Bhajan


From so many days I was searching for Lyrics on this bhajan “Aarti Kunj Bihari Ki, Shree Giridhar Krishna Murari Ki”.
Here is the hindi Lyrics for this hindi bhajan.

Bol Krishan Kanhiyaa Lal Ki Jai.

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली |
भ्रमर सी अलक | (Fast)
कस्तूरी तिलक | (Fast)
चंद्र सी झलक | (Fast)
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की…

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग | (Fast)
मधुर मिरदंग | (Fast)
ग्वालिन संग | (Fast)
अतुल रति गोप कुमारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा;
बसी सिव सीस | (Fast)
जटा के बीच | (Fast)
हरै अघ कीच | (Fast)
चरन छवि श्रीबनवारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
हंसत मृदु मंद | (Fast)
चांदनी चंद | (Fast)
कटत भव फंद | (Fast)
टेर सुन दीन भिखारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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