Category Archives: india

Sarveshwari Jagdishwari Bhajan – Hindi Lyrics


सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी ।
ममतामयी करुणामयी – २ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

जगजीवनी संजीवनी, समस्त जीवनेश्वरी। – २
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

कृपालिनी जगतारिणी, प्रतिपल भुवन हृदयेश्वरी। -२
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।- २

तमहारीनी शुभकारणी, मनमोहिनी विश्वेश्वरी। – २
हे मातृ रूप महेश्वरी।
सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।
ममतामयी करुणामयी – २ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

सर्वेश्वरी जगदीश्वरी -२ , हे मातृ रूप महेश्वरी।

Jai Mata Di.

Shri Daba Hanuman Ji Temple, Sirohi


This is Daba Hanuman Ji Mandir outside Sirohi City.
Very lonely and very peaceful temple.

My father took me to this place when I was in 6th class. I have very beautiful memories for this temple.

My father told me that this is called as DABA HANUMAN JI because the priest was worshiping the god from left hand. In Sirohi marwadi language left is called as DABA.

So the name has “Daba Hanuman Ji ka Mandir”.

 

Flag at daba haunman ji mandir, sirohiShri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiShri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiShri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiLordDaba Hanuman Ji Mandir, Sirohi
Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiOutside of Shri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiOutside of Shri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiOutside of Shri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiOutside of Shri Daba Hanuman Ji Mandir, SirohiMaharaj at daba hanuman ji temple, sirohi
Maharaj at daba hanuman ji temple, sirohiMaharaj at daba hanuman ji temple, sirohiMaharaj at daba hanuman ji temple, sirohiMaharaj at daba hanuman ji temple, sirohi

Sirohi, Rajasthan, a set on Flickr.

One of my favourite temple in Sirohi. I try to visit every time.

Jai Shree Ram.

Happy Hanuman Ji.

Sukhharta Dukhharta Hindi Meaning


Ganapatai Bappa Morya..

This year I chanted this aarti many times and this is in marathi. I learned it but I never knew the meaning of this aarti.
So I found the meaning of this aarti and edited it as per learning and observation.

Please suggest if any changes are required.

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची । नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची ।।
सार्वांगी सुन्दर उटि शेंदुराची । कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची ||
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति । दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ति ।। 1 ।।

भगवान् जो हमे सुख देते है और दुखो को दूर करते है. सभी मुश्किलों से मुक्त करते है. जो आशीर्वाद के रूप मैं हर जगह अपना प्यार फैलाते है. ||
जिनके शारीर पर सुन्दर लाल-नारंगी रंग है. और गले मैं अति-सुन्दर मोतियों ( मुक्ताफल ) की मारा पहनी हुई है. ||
भगवान् की इस मंगल मूर्ति से प्रार्थना करो. भगवान् के दर्शन मात्र से ही हमारी सारी इच्छाओ की पूर्ति हो जायेगी. ||१||

रत्नखचित फरा तुज गौरी कुमरा । चंदनाची उटि कुंकुमकेशरा ।।
हीरेजडित मुगुट शोभतो बरा । रुनझुनती नूपुरे चरनी घागरिया ।|
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति । दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ति ।। 2 ।।

हे गौरी पुत्र, ये रत्नों से जडित मुकुट आपके लिए है, आपके शारीर पर चन्दन का लेप लगा हुआ है और मस्तक भाल पर पर लाल रंग का तिलक लगा हुआ है. ||
हीरो से जडित सुन्दर सा मुकुट है और आपके आपके चरणों के पास मैं पायल की ध्वनि बहुत अच्छी लग रही है. ||
भगवान् की इस मंगल मूर्ति से प्रार्थना करो. भगवान् के दर्शन मात्र से ही हमारी सारी इच्छाओ की पूर्ति हो जायेगी. || २ ||

लम्बोदर पिताम्बर फणिवर बंधना । सरळ तोंड वक्रतुंड त्रिनयना ।।
दास रामाचा वाट पाहे सदना । संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना ।।
जयदेव जयदेव जय मंगलमूर्ति ।। दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ति ।। ३ ।।

भगवान् आपका बड़ा पेट है और आपने पीली धोती पहनी हुई है. आपके सरल और मुड़ी हुई सूंड है और आपके तीन आँखे है.
लेखक रामदास कहते है की मैं आपकी साधना मैं ये लिख रहा हु, मुश्किल के समय मैं सदेव हमारी रक्षा और सहायता करना.
भगवान् की इस मंगल मूर्ति से प्रार्थना करो. भगवान् के दर्शन मात्र से ही हमारी सारी इच्छाओ की पूर्ति हो जायेगी. || ३ ||

Happy Ganapati.

Grishneshwar Jyothirlinga


This year we have planned for Grishneshwar Jyothirlinga.

About
Grishneshwar is an ancient pilgrimage site revered as the abode of one of the 12 Jyotirlingas of Shiva.
The place is extremely small and the local transport options are limited. Buses and private taxis are the best ways to get around town.

The temple is constructed in red rocks and the temple is eye catching. The temple has a 5 tier Shikara, which is very attractive. Shikara is crowned with images of Bull and Monkeys.

Timings
As per the recoreds the temple open from 0530 Hrs to 2130 Hrs and in Holy Shravan month its open from 0300 Hrs to 2300 Hrs.

Where :
About 25-30 km towards the west side of Aurangabad, there is a village called Verul.

Map Location :
http://maps.google.com/maps?ll=20.024722,75.169444&spn=0.01,0.01&t=m&q=20.024722,75.169444

How to Reach
From aurangabad city you can take buses or privita taxi its around 30 KM from the city. The famous Ellora Caves are near to jyotirlinga.

Photos
Grishneshwar Jyotirlinga

Grishneshwar Jyotirlinga

A small market at temple premises.
Grishneshwar Jyotirlinga

Monday morning queue at temple
Monday morning long queue at Grishneshwar Jyotirlinga

Queue inside
Grishneshwar Jyotirlinga

Inside View
Grishneshwar Jyotirlinga

Temple Structure
Grishneshwar Jyotirlinga

Grishneshwar Jyotirlinga

Grishneshwar Jyotirlinga

Shendur Lal Chadhayo Hindi-Marathi Lyrics


My wife got this caller tune. I liked very much.
Thought to get the lyrics for the same. That will be help full for every one.

शेंदूर लाल चढायो अच्छा गजमुखको ||
दोंदिल लाल बिराजे सूत गौरीहरको ||
हाथ लिए गुड-लड्डू साईं सुरवरको ||
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पदको || 1 ||

जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता || धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||

अष्टो सिद्धि दासी संकटको बैरी ||
विघनाविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ||
कोटि सूरजप्रकाश ऐसी छबि तेरी ||
गंड-स्थल मदमस्तक झूले शाशिहारी || 2 ||

जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता || धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||

भावभगत से कोई शरणागत आवे ||
संतति सम्पति सभी भरपूर पावे ||
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ||
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे || 3 ||

जय जय श्री गणराज विध्यासुखदाता || धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ||

Let me know if there are any mistake in type.

Gana Pati Bappa Morya.

Trip to Shri Bhimashankar Jyotirlinga


Har Har Mahadev.

In June 2011 we visited Shri Bhimashankar Jyotirlinga.
The best time to visit Bhimashankar is mansoon time. June-Aug is the best time to visit the temple.

There are many ways to visit Bhimashankar.
1. Via Trekking from Karjat.
2. Via road side from mumbai-pune highway then by-pass to Talegaon-Chakkan highway road.

Things to know :
1. Temple is very quite and very peaceful.
2. Take all food items with you, very less facility available for food and restaurant.
3. If you love village and villagers then you will love this place.
4. Temple is walkable from bus-station, few walking steps.

05062011894

05062011892

In mansoon season the entire way is very good, you feel refreshing.
on the way to bhimashankar

Once you read the bus-stop you have to walk for 5 min
Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Market Road

The Temple entrence starts from here –
Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Entrence Start

Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Entrence

Inside temple
Inside Bhimashankar Temple

The entire experience is awesome.

Har Har Mahadev.

Happy Worship.

Agnipath Poem in Hindi – अग्निपथ कविता


आदरणीय श्री हरिवंश राय बच्चन जी की कविता “अग्निपथ”

वृक्ष हो भले खड़े, हो घने हो बड़े, एक पत छाव की |
मांग मत, मांग मत, मांग मत ||
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |||

तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी |
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ ||
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |||

ये महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु स्वेद रक्त से |
लथपथ, लथपथ, लथपथ ||
अग्निपथ, अग्निपथ, अग्निपथ |||

श्री बच्चन जी को शत शत वंदन.

Shiv Tandav Stotra in Sanskrit-Hindi Lyrics with easy readble format


||सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ||

||श्रीगणेशाय नमः ||

जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि |
धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२||

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे |
कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||३||

लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |
मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||४||

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः |
भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||५||

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |
सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||६||

कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके |
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम |||७||

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः |
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||८||

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् |
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||९||

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||१०||

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस – द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्- – गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||१२||

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३||

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

Added on 2012-09-17
This is one file I listen daily. In south indian tone.

If you are not able to listen the file please give feedback I will add the mp3 file.

just random post for march


So in march month I have not written any thing.
So hey everyone.

I hope india winds the world cup.

Answers from Sri Sri Ravishankar of Art of Living on Lord Krishna’s Gita Question.


Today I got mail from Rajendran Ganesan (http://shanthiraju.wordpress.com/) I am very fond of his blog. One of my favorite blog.

He sent this mail… I just liked it… I am printing as it is.

-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=
An answer from Sri Sri Ravishankar of Art of Living, for a question which is grossly misunderstood by many of us, I believe.
>>>>
Q: Lord Krishna has said in the ‘Gita’ to sacrifice the fruits of action. Is

it possible to do that in real life?

Sri Sri: No, Krishna never asked you to sacrifice the fruits of action. He
says, in any case you have no control over the fruits of your actions.
Therefore put your attention on the performance of action. While running a
race, have the attention on yourself and not on the other tracks. His advice
is utterly practical.

Q: Then, don’t we have to look at the competition?

Sri Sri: Life is complex. Take this and that together. If you are not aware
of what is happening around you, you will miss out. Improve your intuitive
ability.

>>>>
-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=

My हिंदी Translation for easy understanding.

Q. भगवान कृष्ण ने ‘गीता’ में कहा है कि कार्रवाई के फल का त्याग करो, क्या यह वास्तविक जीवन में करना संभव है?
A. भगवान कृष्ण नें कभी नहीं कहा है की तुम कर्म के फलो का त्याग करो. बल्कि उनका तो ये मानना है की किसी भी मामले मैं मनुष्य का कर्म के फलो पर कोई नियंत्रण नहीं है.
इसलिए कार्रवाई के प्रदर्शन पर अपना ध्यान रख. जैसे की एक प्रतियोगिता की दौड़ मैं दौड़ते वक़्त मनुष्य को अपनी दौड़ मैं ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ना की दुसरे की दौड़ पर.
उनकी सलाह पूरी तरह से व्यावहारिक है.

Q. तो क्या हम वास्तविक जीवन की प्रतियोगिता मैं भाग ना लेवे. ?
A. जीवन जटिल है सब कुछ एक साथ ले कर चलो.
यदि आप नहीं जानते हैं की तुम्हारे चारो तरफ क्या हो रहा है तो तुम गुम जाओगे. अंतर्ज्ञानी बनो.

So कर्म करता जा फल की इच्छा मत कर.

Happy Worship. Happy Hard Work. Happy Success.

Happy Indian Republic Day – भारतीय गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये


भारतीय गणतंत्र दिवस की आप सभी को शुभकामनाये.

जी देश वासियों आज ही के दिन सन 1950 मैं भारत राष्ट्र का संविधान लागू हुआ था.

संविधान की प्रस्तावना:
” हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में
आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार ग्यारह विक्रमी) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।”

The preamble to the Constitution of India
WE, THE PEOPLE OF INDIA, having solemnly resolved to constitute India into a SOVEREIGN SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC and to secure to all its citizens:
JUSTICE, social, economic and political;
LIBERTY of thought, expression, belief, faith and worship;
EQUALITY of status and of opportunity;
and to promote among them all
FRATERNITY assuring the dignity of the individual and the unity and integrity of the Nation;
IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty-sixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT, ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.

To watch Indian Republic Day Parade. Watch Republic Day Celebrations.

Happy Indian Republic Day.

India, happy independence day


Happy Independence Day to everyone. Today is great day.

हर वर्ष की १५ अगस्त भारत वर्ष मैं स्वंतंत्रता दिवस के रूप मैं मनाई जाती है. आज ही के दिन सन १९४७ मैं भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति मिली थी और आज ही के दिन भारत एक स्वंतत्र, सामाजिक और धरम-निरपेक्ष देश के रूप मैं उभरा.

लीजिये प्रस्तुत है एक महान गीत ये उन सभी वीरो की याद दिलाता है जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगा कर हिंदुस्तान को आजादी दिलवाई.
आईये हम सब मिलकर उन सभी वीरो को याद करे. उन सभी वीरो को शत-शत वंदन जो अपनी जान की बाजी लगा कर हमारे देश की सेवा कर रहे है.

ए मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गंवाई
कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर ना आये, जो लौट के घर ना आये.

ए मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी

जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी सांस लड़े वो, फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा, सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद…

जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद…

कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी
सरहद पे मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर, वो खून था हिन्दुस्तानी
जो शहीद …

थी खून से लथ-पथ काया, फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद …

तुम भूल ना जाओ उनको, इस लिए कही ये कहानी
जो शहीद…
जय हिंद, जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी

जब अंत-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं

जय हिंद, जय भारत.

जय हिंद, जय भारत.

moment of pride – ticket booking throught IRCTC


Case: Ticket Booking for diwali, Need train ticket for 3rd november, 2010 and ticket are available from today aka 5th August, 2010.

Train: Aravali Express 9707

Situation:

  • At 0800 Hrs – Booking is not allowed IRCTC says you can book ticket after 8 AM, may be my watch is fast. Hold On you Breath…
  • At 0805 Hrs – Oh!! its showing the seats available total seats avail is around 400.I am ready with Quick Book Facility. Fast.Fast..Fast…
  • At 0807 Hrs – Clicked on quick book and payment is done. Good.Good..Good…
  • At 0808 Hrs – Payment is success fully done, and WTF it shows the error page from IRCTC. Prayed to GOD. 😦 Shit.Shit..Shit…
  • At 0809 Hrs – OMG!! Tickets are booked, thanks to Lord. Got only UB and SU. OMG.OMG..OMG…
  • At 0810 Hrs – WTF! Just checking the further status. The ticket status is now WL 156. Oh!Oh!!Oh!!!
  • At 0815 Hrs – Service Unavailable. 😦 😦 😦

Tickets are booked. Its like moment of pride. 😛

Happy Journey.

Darshan timings for famous temples in mewar area of rajasthan


Timings for famous temples in Mewar Area of Rajasthan.

1. EklingNath Mahadev, Ek ling ji, Udaipur.

2. Shree Nath Ji, Nathdwara
Shri Nathdwara (a pathway to Lord Shri Krishna)
http://en.wikipedia.org/wiki/Nathdwara

3. Dawarka Dheesh Ji, Kankroli
Sri Dwarkadish Prabhu ( Lord Krishna as King of Dwarka )
http://en.wikipedia.org/wiki/Kankroli

4. CharBhuja Nath Ji, Rajsamand.
Charbhuja nath or charbhuja ji is an another name of lord Vishnu
http://en.wikipedia.org/wiki/Charbhuja

Happy Mewar, Happy Worship.

shri ram chandra kripalu bhajman in hindi (श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन)


Today isShree Ram Navmi.  I have not found any translation or Shree ram chandra kripalu bhajman Shloka.

So here I present the hindi/sanskrit shloka of “shree ram chandra kripalu bhajman”.

बोलो सीता राम दरबार की जय.

श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं,
नवकंज लोचन, कंजमुख कर, कंज पद कंजारुणं.

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम,
पट पीत मानहु तडित रूचि-शुची नौमी, जनक सुतावरं.

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंष निकन्दनं,
रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम.

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुशनम,
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं.

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं,
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं.

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिं हरषीं अली,
तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली.

जानी गौरी अनूकोल, सिया हिय हिं हरषीं अली,
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे.

बोल सीता राम दरबार की जय.
बोल सिया वर राम चन्द्र की जय.
पवन सुत हनुमान की जय.

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