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Archive for the ‘religious’ Category

Trip to Shri Bhimashankar Jyotirlinga

February 6, 2012 Leave a comment

Har Har Mahadev.

In June 2011 we visited Shri Bhimashankar Jyotirlinga.
The best time to visit Bhimashankar is mansoon time. June-Aug is the best time to visit the temple.

There are many ways to visit Bhimashankar.
1. Via Trekking from Karjat.
2. Via road side from mumbai-pune highway then by-pass to Talegaon-Chakkan highway road.


View Larger Map

Things to know :
1. Temple is very quite and very peaceful.
2. Take all food items with you, very less facility available for food and restaurant.
3. If you love village and villagers then you will love this place.
4. Temple is walkable from bus-station, few walking steps.

05062011894

05062011892

In mansoon season the entire way is very good, you feel refreshing.
on the way to bhimashankar

Once you read the bus-stop you have to walk for 5 min
Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Market Road

The Temple entrence starts from here -
Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Entrence Start

Shiva Jyotrilanga BhimaShankar Temple Entrence

Inside temple
Inside Bhimashankar Temple

The entire experience is awesome.

Har Har Mahadev.

Happy Worship.

Achyutam Keshavam (अच्युतम केशवं ) Hindi Lyrics

November 29, 2011 4 comments

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं || -2

कौन कहता है भगवान आते नहीं, तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान खाते नहीं, बेर शबरी के जैसे खिलते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान सोते नहीं, माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं, तुम गोपी के जैसे नचाते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

कौन कहता है भगवान नचाते नहीं, गोपियों की तरह तुम नाचते नहीं |
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी वल्लभं ||

Shiv Tandav Stotra in Sanskrit-Hindi Lyrics with easy readble format

November 27, 2011 3 comments

||सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ||

||श्रीगणेशाय नमः ||

जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलो लवी चिवल्लरी विराजमान मूर्धनि |
धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२||

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे |
कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ||३||

लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |
मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||४||

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः |
भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||५||

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |
सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||६||

कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके |
धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम |||७||

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः |
निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||८||

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् |
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||९||

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||१०||

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस – द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्- – गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |
तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||१२||

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३||

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

Aarti Kunj Bihari Ki : Hindi Lyrics : Lord Krishana Bhajan

October 18, 2011 Leave a comment

From so many days I was searching for Lyrics on this bhajan “Aarti Kunj Bihari Ki, Shree Giridhar Krishna Murari Ki”.
Here is the hindi Lyrics for this hindi bhajan.

Bol Krishan Kanhiyaa Lal Ki Jai.

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली |
भ्रमर सी अलक | (Fast)
कस्तूरी तिलक | (Fast)
चंद्र सी झलक | (Fast)
ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की…

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै;
बजे मुरचंग | (Fast)
मधुर मिरदंग | (Fast)
ग्वालिन संग | (Fast)
अतुल रति गोप कुमारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा;
बसी सिव सीस | (Fast)
जटा के बीच | (Fast)
हरै अघ कीच | (Fast)
चरन छवि श्रीबनवारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;
हंसत मृदु मंद | (Fast)
चांदनी चंद | (Fast)
कटत भव फंद | (Fast)
टेर सुन दीन भिखारी की ॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की…

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

Answers from Sri Sri Ravishankar of Art of Living on Lord Krishna’s Gita Question.

February 22, 2011 1 comment

Today I got mail from Rajendran Ganesan (http://shanthiraju.wordpress.com/) I am very fond of his blog. One of my favorite blog.

He sent this mail… I just liked it… I am printing as it is.

-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=
An answer from Sri Sri Ravishankar of Art of Living, for a question which is grossly misunderstood by many of us, I believe.
>>>>
Q: Lord Krishna has said in the ‘Gita’ to sacrifice the fruits of action. Is

it possible to do that in real life?

Sri Sri: No, Krishna never asked you to sacrifice the fruits of action. He
says, in any case you have no control over the fruits of your actions.
Therefore put your attention on the performance of action. While running a
race, have the attention on yourself and not on the other tracks. His advice
is utterly practical.

Q: Then, don’t we have to look at the competition?

Sri Sri: Life is complex. Take this and that together. If you are not aware
of what is happening around you, you will miss out. Improve your intuitive
ability.

>>>>
-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=-=

My हिंदी Translation for easy understanding.

Q. भगवान कृष्ण ने ‘गीता’ में कहा है कि कार्रवाई के फल का त्याग करो, क्या यह वास्तविक जीवन में करना संभव है?
A. भगवान कृष्ण नें कभी नहीं कहा है की तुम कर्म के फलो का त्याग करो. बल्कि उनका तो ये मानना है की किसी भी मामले मैं मनुष्य का कर्म के फलो पर कोई नियंत्रण नहीं है.
इसलिए कार्रवाई के प्रदर्शन पर अपना ध्यान रख. जैसे की एक प्रतियोगिता की दौड़ मैं दौड़ते वक़्त मनुष्य को अपनी दौड़ मैं ध्यान केन्द्रित करना चाहिए ना की दुसरे की दौड़ पर.
उनकी सलाह पूरी तरह से व्यावहारिक है.

Q. तो क्या हम वास्तविक जीवन की प्रतियोगिता मैं भाग ना लेवे. ?
A. जीवन जटिल है सब कुछ एक साथ ले कर चलो.
यदि आप नहीं जानते हैं की तुम्हारे चारो तरफ क्या हो रहा है तो तुम गुम जाओगे. अंतर्ज्ञानी बनो.

So कर्म करता जा फल की इच्छा मत कर.

Happy Worship. Happy Hard Work. Happy Success.

India, happy independence day

August 15, 2010 2 comments

Happy Independence Day to everyone. Today is great day.

हर वर्ष की १५ अगस्त भारत वर्ष मैं स्वंतंत्रता दिवस के रूप मैं मनाई जाती है. आज ही के दिन सन १९४७ मैं भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से मुक्ति मिली थी और आज ही के दिन भारत एक स्वंतत्र, सामाजिक और धरम-निरपेक्ष देश के रूप मैं उभरा.

लीजिये प्रस्तुत है एक महान गीत ये उन सभी वीरो की याद दिलाता है जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगा कर हिंदुस्तान को आजादी दिलवाई.
आईये हम सब मिलकर उन सभी वीरो को याद करे. उन सभी वीरो को शत-शत वंदन जो अपनी जान की बाजी लगा कर हमारे देश की सेवा कर रहे है.

ए मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गंवाई
कुछ याद उन्हें भी कर लो, कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर ना आये, जो लौट के घर ना आये.

ए मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी

जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी सांस लड़े वो, फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा, सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद…

जब देश में थी दिवाली, वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद…

कोई सिख कोई जाट मराठा, कोई गुरखा कोई मद्रासी
सरहद पे मरनेवाला, हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर, वो खून था हिन्दुस्तानी
जो शहीद …

थी खून से लथ-पथ काया, फिर भी बन्दूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा, फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद …

तुम भूल ना जाओ उनको, इस लिए कही ये कहानी
जो शहीद…
जय हिंद, जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद

जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो अपने, थी धन्य वो उनकी जवानी

जब अंत-समय आया तो, कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफ़र करते हैं

जय हिंद, जय भारत.

जय हिंद, जय भारत.

Darshan timings for famous temples in mewar area of rajasthan

June 17, 2010 3 comments

Timings for famous temples in Mewar Area of Rajasthan.

1. EklingNath Mahadev, Ek ling ji, Udaipur.

2. Shree Nath Ji, Nathdwara
Shri Nathdwara (a pathway to Lord Shri Krishna)
http://en.wikipedia.org/wiki/Nathdwara

3. Dawarka Dheesh Ji, Kankroli
Sri Dwarkadish Prabhu ( Lord Krishna as King of Dwarka )
http://en.wikipedia.org/wiki/Kankroli

4. CharBhuja Nath Ji, Rajsamand.
Charbhuja nath or charbhuja ji is an another name of lord Vishnu
http://en.wikipedia.org/wiki/Charbhuja

Happy Mewar, Happy Worship.

shri ram chandra kripalu bhajman in hindi (श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन)

March 24, 2010 13 comments

Today isShree Ram Navmi.  I have not found any translation or Shree ram chandra kripalu bhajman Shloka.

So here I present the hindi/sanskrit shloka of “shree ram chandra kripalu bhajman”.

बोलो सीता राम दरबार की जय.

श्रीरामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं,
नवकंज लोचन, कंजमुख कर, कंज पद कंजारुणं.

कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम,
पट पीत मानहु तडित रूचि-शुची नौमी, जनक सुतावरं.

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंष निकन्दनं,
रघुनंद आनंद कंद कोशल चन्द्र दशरथ नंदनम.

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारू उदारु अंग विभुशनम,
आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम-जित-खर दूषणं.

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं,
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनं.

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिं हरषीं अली,
तुलसी भावानिः पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली.

जानी गौरी अनूकोल, सिया हिय हिं हरषीं अली,
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे.

बोल सीता राम दरबार की जय.
बोल सिया वर राम चन्द्र की जय.
पवन सुत हनुमान की जय.

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