romantic love poem
Now a days i am feeling romantic.
just got this kavita/poem…
This is by Dr. Kumar Vishwas.
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है.
मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है.
मैं तुझसे दूर कैसा हु, तू मुझसे दूर कैसी है.
ये तेरा दिल समझता है, या मेरा दिल समझता है.






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